मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।

दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

जिंदगी अच्छे और बुरे दोनों पलों से मिलकर बनी है, दोनों का अपना अपना स्वाद है। एक के बिना दूसरा अधूरा है, अतः न तो कभी खुशी में ज्यादा इठलाएं, न ही कभी गम को दिल से लगाएं।

जिंदगी अच्छे और बुरे दोनों पलों से मिलकर बनी है, दोनों का अपना अपना स्वाद है। एक के बिना दूसरा अधूरा है, अतः न तो कभी खुशी में ज्यादा इठलाएं, न ही कभी गम को दिल से लगाएं।

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना  डूबने का डर। जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता है। 

अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना  डूबने का डर।  जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता...
मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

बल और शक्ति की आज्ञा टालना आसान है मगर प्यार की आज्ञा टालना आसान नहीं हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर आलोचना तारीफ विवेचना कुछ मायने नहीं रखती है l 

बल और शक्ति की आज्ञा टालना आसान है मगर प्यार की आज्ञा टालना आसान नहीं हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर आलोचना तारीफ विवेचना कुछ मायने नहीं रखती है l 

मुस्कुराने की मकसद ना ढूंढो, वरना जिंदगी यूं ही कट जाएगी, कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो, आपके साथ-साथ जिंदगी भी मुस्कुराएगी। 

योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है l

योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है...
स्वच्छता दूत: रिपुदमन बेवली

स्वच्छता दूत: रिपुदमन बेवली

पहला सुख निरोगी काया, एक बहुत पुरानी कहावत एवं शाश्वत सत्य है जिसे हजारों वर्षों से लोग समझते आए है। निरोगी अर्थात स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है जिसे हर इंसान को समझना ही पड़ता है। कुछ बचपन से ही समझ जाते है, कुछ युवा अवस्था में समझते है नहीं तो बुढ़ापे में तो सभी को...
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