by Mrigendra Raj Pandey
कमर से नीचे का पूरा हिस्सा दिव्यांग हो जाने के कारण जब स्वयं की रोजमर्रा की सामान्य जिंदगी जीना ही कठिन हो जाए तो ऐसी हालत में पढ़ना लिखना ,वह भी असाधारण रूप में ,इतना ही नहीं अन्य के जीवन को भी पढ़ा लिखा कर संवारने का हुनर और जज्बा हर किसी के बूते में नहीं होता है।...
by Mrigendra Raj Pandey
पुलिस की वर्दी देखते ही क्रूर, संवेदनहीन, करुणा दया से रहित मनुष्य का चेहरा सामान्य तौर पर मन मस्तिष्क में उभरता है। यह सत्य है कि सामाजिक मूल्यों में अवमूल्यन आने से अन्य क्षेत्रों की तरह पुलिस महकमे में भी आने वाले व्यक्तियों पर इसका असर पड़ना आस्वाभाविक नहीं था...
by Mrigendra Raj Pandey
गोवा की बेहतरीन इमारतों ,आलीशान भवनों, होटलों, स्कूलों ,कालेजों आदि के खूबसूरत डिजाइनिंग के लिए आर्किटेक्ट जगत का ख्याति प्राप्त नाम है श्री सिद्धार्थ दयानंद नायक (Siddharth Dayanand Nayak) ।गोवा में बने एक से बढ़कर एक लाजवाब भवन आपके शिल्प कौशल का बयान खुद-ब-खुद करते...
by Mrigendra Raj Pandey
भारतीय समाज में किन्नरों (transgender) की उपस्थिती प्राचीनकाल से ही रही है। विविध पौराणिक ग्रंथों में इनका उल्लेख मिलता है। रामायण काल और महाभारत काल में तो इनका प्रमुखता से वर्णन है। हर वर्ग द्वारा दुर्भाग्य से समाज के एक घटक के रूप में इनको प्रायः नजर अंदाज किया...
by Mrigendra Raj Pandey
सनातन धर्मावलंबियों की आस्था के आधार के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी से श्रीमद्भागवत गीता का स्थान रहा है। इस पर अनेकानेक विद्वानों, मनीषियों, संत जनों, साहित्यकारों द्वारा विविध प्रकार से लिखा जाता रहा है और जनसामान्य को इसके द्वारा दिखाए गए मूल्यों को आत्मसात करने हेतु...
by Mrigendra Raj Pandey
केवल 4 मात्रा पर आधारित विश्व की सबसे छोटी गजल लिखना अपने आप में अजूबा होता है लेकिन यह कारनामा कर दिखाया है उज्जैन निवासी मोहम्मद आरिफ खान (Mo. Arif Khan) ने । 9 मई 1970 को भैरव गढ़ उज्जैन में बेहद गरीब परिवार में जन्मे आरिफ जी के जीवन में कठिनाइयों ने अपना गहन जाल...
by Mrigendra Raj Pandey
मनुष्य के शरीर में हृदय यानी दिल का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है जो कि शरीर के लगभग मध्य में स्थित होता है, इसीलिए मध्य में रहने वाले को दिल के करीब होने का दर्जा स्वतः मिल जाता है, चाहे वह व्यक्ति हो, स्थान हो अथवा कला। मध्य प्रदेश के हृदय के रूप में दर्जा प्राप्त...
by Mrigendra Raj Pandey
झुंझुनू ,राजस्थान में 31 दिसंबर 2006 को श्री वीरेंद्र क्यामसारिया जी के यहां जन्मी सुश्री निकिता कयामसरिया (Nikita Kyamsariya) ने अत्यंत छोटी सी उम्र में ही गुलाटी लगाने लगी,जिस उम्र में आमतौर पर बच्चे माता पिता की गोद में ही रहने में आनंदित होते हैं ।एक दिन अचानक...
by Mrigendra Raj Pandey
मन लागा मेरा यार फकीरी में। ये पंक्तियां श्री हरि व्योम (Hari Vyom) जी के ऊपर सौ फ़ीसदी खरी उतरती हैं। दूरदर्शन विभाग में बनी, बनाई सरकारी सेवा को छोड़कर आप कोलकाता में आकर अंध प्रतिभाओं के कल्याणार्थ लग गए और वहीं प्रभु की आराधना में रम कर अल मस्त सन्यासी की तरह...