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अकेले हों तब विचारों पर नियंत्रण रखें, दोस्तों मे हों तब वाणी पर नियंत्रण रखें, गुस्से मे हों तब फैसलों पर नियंत्रण रखें, समूह मे हों तब व्यवहार पर नियंत्रण रखे, जब कोई प्रसंशा करे तब घमंड पर नियंत्रण रखे,एवं जब कोई बुरा बोले तब भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
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इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता है,यह जानते हुए भी कि भाग्य से ऊंचा उसका कर्म है, जो उसके स्वयं के हाथों में है!
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हमे जो मिला है, हमारे भाग्य से ज्यादा मिला है यदि आपकी पाँव में जूते नहीं हैं तो अफसोस मत कीजिये दुनियां में तो कई लोगों के पास पाँव ही नहीं है।
संसार में कोई भी मनुष्य सर्वगुण संपन्न नही होता! इसलिए कुछ कमियों को नजरंदाज करिए और रिश्ते बनाए रखिए!