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दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।
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' डर' कहता है,यह असंभव है। 'अनुभव' कहता है,यह जोखिम भरा है। ' तर्क ' कहता है,यह कठिन है। परंतु,' साहस ' कहता है, एक बार ' प्रयास ' तो कीजिए।
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"भाग्य बारिश का पानी है और परिश्रम कुंए का जल।" बारिश में नहाना आसान तो है लेकिन रोज नहाने के लिए हम बारिश के सहारे नहीं रह सकते। इसी प्रकार भाग्य से कभी-कभी चीजे आसानी से मिल जाती है किन्तु हमेशा भाग्य के भरोसे नहीं जी सकते।
“सारी मुसीबतें” रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो जाएंगीं।