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पानी का असली स्वाद तब पता लगता है जब हम बहुत प्यासे होते हैं। ठीक उसी तरह प्रेम और सहयोग का पता तब चलता है जब हम बहुत कठिनाई में होते हैं।
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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
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"खुशियों" का ताल्लुक "दौलत" से नही होता जिसका मन "मस्त" है उसके पास "समस्त" है।
हर चीज वही मिल जाती है, जहाँ वो खोयी हो, लेकिन, विश्वास वहाँ कभी नही मिलता,जहाँ एक बार खो जाता है।