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प्रकृति ने सिर्फ दो ही रास्ते दिए हैं! "या तो देकर जाएं या, फिर.. छोड़कर जाएं"! साथ ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है! अतःकुछ ऐसा छोड़कर जाए कि हमेशा लोगो कि यादो में बने रहे।
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हर चीज वही मिल जाती है, जहाँ वो खोयी हो, लेकिन, विश्वास वहाँ कभी नही मिलता,जहाँ एक बार खो जाता है।
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"बहस" और "बातचीत" में एक बड़ा फर्क है "बहस" सिर्फ़ यह सिद्ध करती है, *कि "कौन सही है" । जबकि "बातचीत" यह तय करती है,कि "क्या सही है"।
ज्ञान की बारिश जहाँ भी हो रही हो भीगते रहिए। हर शख्स कुछ न कुछ सिखाता है बस सीखते रहिए।