फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।

दुनिया में दान जैसी कोई सम्पत्ति नहीं, लालच जैसा कोई और रोग नहीं, अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नही, और संतोष जैसा और कोई सुख नहीं।

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

जिंदगी अच्छे और बुरे दोनों पलों से मिलकर बनी है, दोनों का अपना अपना स्वाद है। एक के बिना दूसरा अधूरा है, अतः न तो कभी खुशी में ज्यादा इठलाएं, न ही कभी गम को दिल से लगाएं।

जिंदगी अच्छे और बुरे दोनों पलों से मिलकर बनी है, दोनों का अपना अपना स्वाद है। एक के बिना दूसरा अधूरा है, अतः न तो कभी खुशी में ज्यादा इठलाएं, न ही कभी गम को दिल से लगाएं।

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना  डूबने का डर। जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता है। 

अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना  डूबने का डर।  जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता...
फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

बल और शक्ति की आज्ञा टालना आसान है मगर प्यार की आज्ञा टालना आसान नहीं हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर आलोचना तारीफ विवेचना कुछ मायने नहीं रखती है l 

बल और शक्ति की आज्ञा टालना आसान है मगर प्यार की आज्ञा टालना आसान नहीं हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर आलोचना तारीफ विवेचना कुछ मायने नहीं रखती है l 

फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता हैl उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती हैl

योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है l

योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है...
स्वच्छता दूत: रिपुदमन बेवली

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पहला सुख निरोगी काया, एक बहुत पुरानी कहावत एवं शाश्वत सत्य है जिसे हजारों वर्षों से लोग समझते आए है। निरोगी अर्थात स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है जिसे हर इंसान को समझना ही पड़ता है। कुछ बचपन से ही समझ जाते है, कुछ युवा अवस्था में समझते है नहीं तो बुढ़ापे में तो सभी को...
दिल्ली में महिलाओं के संघठन ने ऑनलाइन वर्कशॉप कर बनाया विश्व कीर्तिमान

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6 जून 2020 का दिन दिल्ली प्रादेशिक माहेश्वरी महिला संगठन (Delhi Pradeshik Maheshwari Mahila Sanghthan) के लिए अत्यंत ही खुशी का पैग़ाम लेकर आया क्योंकि कोरोना के दौरान महिलाओं का हौसला बढ़ाने एवं उनके कौशल विकास के लिए चलाई गई दो महीनों की ऑनलाइन वर्कशॉप, गोल्डन बुक...
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