यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है।  यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है।  यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

जिंदगी अच्छे और बुरे दोनों पलों से मिलकर बनी है, दोनों का अपना अपना स्वाद है। एक के बिना दूसरा अधूरा है, अतः न तो कभी खुशी में ज्यादा इठलाएं, न ही कभी गम को दिल से लगाएं।

जिंदगी अच्छे और बुरे दोनों पलों से मिलकर बनी है, दोनों का अपना अपना स्वाद है। एक के बिना दूसरा अधूरा है, अतः न तो कभी खुशी में ज्यादा इठलाएं, न ही कभी गम को दिल से लगाएं।

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है।  यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना  डूबने का डर। जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता है। 

अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना  डूबने का डर।  जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता...
यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है।  यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

बल और शक्ति की आज्ञा टालना आसान है मगर प्यार की आज्ञा टालना आसान नहीं हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर आलोचना तारीफ विवेचना कुछ मायने नहीं रखती है l 

बल और शक्ति की आज्ञा टालना आसान है मगर प्यार की आज्ञा टालना आसान नहीं हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर आलोचना तारीफ विवेचना कुछ मायने नहीं रखती है l 

यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी “रक्तदान” है।  यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह “श्रम दान” है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह “अन्न दान” है।

योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है l

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स्वच्छता दूत: रिपुदमन बेवली

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पहला सुख निरोगी काया, एक बहुत पुरानी कहावत एवं शाश्वत सत्य है जिसे हजारों वर्षों से लोग समझते आए है। निरोगी अर्थात स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है जिसे हर इंसान को समझना ही पड़ता है। कुछ बचपन से ही समझ जाते है, कुछ युवा अवस्था में समझते है नहीं तो बुढ़ापे में तो सभी को...
दिल्ली में महिलाओं के संघठन ने ऑनलाइन वर्कशॉप कर बनाया विश्व कीर्तिमान

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6 जून 2020 का दिन दिल्ली प्रादेशिक माहेश्वरी महिला संगठन (Delhi Pradeshik Maheshwari Mahila Sanghthan) के लिए अत्यंत ही खुशी का पैग़ाम लेकर आया क्योंकि कोरोना के दौरान महिलाओं का हौसला बढ़ाने एवं उनके कौशल विकास के लिए चलाई गई दो महीनों की ऑनलाइन वर्कशॉप, गोल्डन बुक...
विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने को समर्पित: इंजीनियर स्वप्निल कुमार शर्मा

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अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थानों से बीटेक एवं एमटेक की पढ़ाई करके, बेहतरीन पदों पर कार्य करते हुए एवं अतिव्यस्त रहने के बावजूद प्रतिपल विज्ञान के नूतन आविष्कारों के बारे में सोचते रहना, कैसे नए-नए वैज्ञानिक आविष्कार आमजन तक पहुंचे इसी में विचार मग्न रहना, तीर्थराज...
असाधारण योग साधक: श्री वीरेंद्र विक्रम सिंह

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उत्तर प्रदेश का एक जिला, बलरामपुर अभी भी विकास के नूतन मानदंडों को प्राप्त करने में पूर्णरूपेण सफल नहीं हुआ है। इंटरनेट एवं हाई फ्रीक्वेंसी के सूचनात्मक उपकरण तो गांव में पहुंच गए हैं, लेकिन शैक्षणिक स्थिति एवं स्वास्थ्यगत समस्याएं अभी भी मुंह बाए खड़ी रहती हैं। ऐसी...
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