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आप अकेले बोल तो सकते है परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है।
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दोष कांटो पर भी कैसे डाले भाई साब, पैर हमने ही रखा था वो तो अपनी जगह सही थे।
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क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।
सबसे बेहतरीन नजर वो है जो अपनी कमियों को देख सके, क्योंकि नींद तो रोज ही खुलती है पर आँखे कभी-कभी ही।