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"मेहनत का फल" और "समस्या का हल" देर से ही सही पर जरूर मिलता है। जो आनंद अपनी छोटी पहचान बनाने मे है, वो किसी बड़े की परछाई बनने मे नही है।
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कोई भी इंसान हमारा दोस्त या दुश्मन बनकर इस दुनिया में नही आता हमारा व्यवहार और बोलने का तरीका ही लोगो को दोस्त और दुश्मन बनाते हैं।
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रिश्ते, दोस्ती और स्नेह हर एक के मुक़द्दर में होते हैं, पर यह रुकते उन्हीं के पास हैं, जहाँ इनकी कदर होती है।
“छोटा” बनके रहें, मिलेगी हर बड़ी “रहमत” “बड़ा” होने पर तो, “मां” भी “गोद” से उतार देती है।