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प्रभु का रास्ता बड़ा सीधा है और बड़ा उलझा भी, बुद्धि से चलो तो बहुत उलझा, और भक्ति से चलो तो बड़ा सीधा। विचार से चलो तो बहुत दूर , और भाव से चलो तो बहुत पास, नजरो से देखो तो कण कण मे , औरअंतर्मन से देखो तो जन जन में।
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जब चलना नहीं आता था, तब कोई गिरने नहीं देता था। और जब चलना सीख लिया तो, हर कोई गिराने में लगा है। यही जीवन की सच्चाई है।
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"मेहनत का फल" और "समस्या का हल" देर से ही सही पर जरूर मिलता है। जो आनंद अपनी छोटी पहचान बनाने मे है, वो किसी बड़े की परछाई बनने मे नही है।
नमक जैसा बनाइये अपना “व्यक्तित्व” आपकी उपस्थिति का भले ही पता न चले पर अनुपस्थिति का अहसास अवश्य होना चाहिये।