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"खामोश" चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती "आँखों" में भी ,"जख्म" गहरे होते है, जिनसे अक्सर "रूठ" जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा "गहरे" होते है।
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बात इतनी मीठी रखो की कभी वापिस लेनी पड़ जाए तो ख़ुद को कड़वी ना लगे।
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अच्छे लोगों की परीक्षा न लीजिए, वे पारे की तरह होते हैं कोई उन पर चोट करता है तो वे टूटते नहीं, फिसल कर चुपचाप आपकी जिन्दगी से निकल जाते हैं
नमक जैसा बनाइये अपना “व्यक्तित्व” आपकी उपस्थिति का भले ही पता न चले पर अनुपस्थिति का अहसास अवश्य होना चाहिये।