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"सवेरा तो रोज ही होता है परन्तु शुभप्रभात क्या होता है?" "जीवन में जिस दिन आप अपने अंदर की बुराईयो को समाप्त कर उच्च विचार तथा अपनी आत्मा को शुद्ध कर दिन की शुरुआत करते हो वही दिन शुभप्रभात होता है"।
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" बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए "समझना" पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो "लेकर जाना" है उसे "छोड़ रहा" है जो "यहीं रह जाना" है उसे "जोड़ रहा" है।
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"सारी मुसीबतें" रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो जाएंगीं।
दिन की शुरूआत में लगता है की ज़िंदगी में पैसा बहुत ज़रूरी है लेकिन दिन ढलने पर समझ आता है कि ज़िंदगी में .शांति अधिक ज़रूरी है।