दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब...
दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हर रोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा, पर ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में क्या मिला रहे है। 

जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हर रोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा, पर ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में क्या मिला रहे...
दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

अकेले हों तब विचारों पर नियंत्रण रखें, दोस्तों मे हों तब वाणी पर नियंत्रण रखें, गुस्से मे हों तब फैसलों पर नियंत्रण रखें, समूह मे हों तब व्यवहार पर नियंत्रण रखे, जब कोई प्रसंशा करे तब घमंड पर नियंत्रण रखे,एवं जब कोई बुरा बोले तब भावनाओं पर नियंत्रण रखें।

अकेले हों तब विचारों पर नियंत्रण रखें, दोस्तों मे हों तब वाणी पर नियंत्रण रखें, गुस्से मे हों तब फैसलों पर नियंत्रण रखें, समूह मे हों तब व्यवहार पर नियंत्रण रखे, जब कोई प्रसंशा करे तब घमंड पर नियंत्रण रखे,एवं जब कोई बुरा बोले तब भावनाओं पर नियंत्रण...
दिल के अच्छे होने से बेहतर है, आप जुबान के अच्छे हों, लोगों का वास्ता पहले जुबान से पड़ता है, दिल तक तो कुछ खास लोग ही पहुंच पाते हैं।

किसी को चोट पहुँचाना उतना ही आसान है जैसे पेड़ से पत्ता तोड़ना, लेकिन किसी को खुश करना एक पेड़ उगाने जैसा है। इसमें बहुत समय, देखभाल और धैर्य लगता है।

किसी को चोट पहुँचाना उतना ही आसान है जैसे पेड़ से पत्ता तोड़ना, लेकिन किसी को खुश करना एक पेड़ उगाने जैसा है। इसमें बहुत समय, देखभाल और धैर्य लगता...