इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता...
इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

“सारी मुसीबतें” रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो जाएंगीं।

“सारी मुसीबतें” रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो...
इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

दौलत और अमीरी इंसान को थोडे़ वक्त के लिए बड़ा बनाती है, लेकिन इंसानियत और अच्छे विचार इंसान को हमेशा बुलंद रखते हैं।

दौलत और अमीरी इंसान को थोडे़ वक्त के लिए बड़ा बनाती है, लेकिन इंसानियत और अच्छे विचार इंसान को हमेशा बुलंद रखते...
इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

जब मन कमजोर होता है परिस्थितियां समस्या बन जाती हैं। जब मन स्थिर होता है परिस्थितियां चुनौती बन जाती हैं। जब मन मजबूत होता है परिस्थितियां अवसर बन जाती हैं।

जब मन कमजोर होता है परिस्थितियां समस्या बन जाती हैं। जब मन स्थिर होता है परिस्थितियां चुनौती बन जाती हैं। जब मन मजबूत होता है परिस्थितियां अवसर बन जाती...
इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

“बोलना” और “प्रतिक्रिया” करना जरूरी है लेकिन “संयम” और “सभ्यता” का दामन नहीं छूटना चाहिये आजाद रहिये “विचारों” से परन्तु बंधे रहिये “संस्कारों” से।

“बोलना” और “प्रतिक्रिया” करना जरूरी है लेकिन “संयम” और “सभ्यता” का दामन नहीं छूटना चाहिये आजाद रहिये “विचारों” से परन्तु बंधे रहिये “संस्कारों”...