” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती...
” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

पानी का असली स्वाद तब पता लगता है जब हम बहुत प्यासे होते हैं। ठीक उसी तरह प्रेम और सहयोग का पता तब चलता है जब हम बहुत कठिनाई में होते हैं।

पानी का असली स्वाद तब पता लगता है जब हम बहुत प्यासे होते हैं। ठीक उसी तरह प्रेम और सहयोग का पता तब चलता है जब हम बहुत कठिनाई में होते...
” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा” है।

” बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए “समझना” पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो “लेकर जाना” है उसे “छोड़ रहा” है जो “यहीं रह जाना” है उसे “जोड़ रहा”...
” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

ढूंढने पर आपको वो ही मिलेंगे जो खो गए थे, वो इंसान कभी नही मिलेंगे जो बदल गए है। तो फिर साझेदारी करो तो किसी के दर्द की करो। क्योंकि खुशियों के तो दावेदार बहुत हैं।

ढूंढने पर आपको वो ही मिलेंगे जो खो गए थे, वो इंसान कभी नही मिलेंगे जो बदल गए है। तो फिर साझेदारी करो तो किसी के दर्द की करो। क्योंकि खुशियों के तो दावेदार बहुत...
” खूबी” और “खामी” दोनों होती हैं हर इंसान में, बस “फर्क” इतना सा है कि। जो “तराशता” है उसे “खूबी” नजर आती है, और जो “तलाशता” है उसे “खामी” नजर आती है।

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब हैं जीवन का आनंद मिलजुल कर रहने में है खुश रहो खुशिया बाँटते रहो।

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं अकेले हम कागज हैं, मिल जाएं तो किताब हैं जीवन का आनंद मिलजुल कर रहने में है खुश रहो खुशिया बाँटते...