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अकेले हों तब विचारों पर नियंत्रण रखें, दोस्तों मे हों तब वाणी पर नियंत्रण रखें, गुस्से मे हों तब फैसलों पर नियंत्रण रखें, समूह मे हों तब व्यवहार पर नियंत्रण रखे, जब कोई प्रसंशा करे तब घमंड पर नियंत्रण रखे,एवं जब कोई बुरा बोले तब भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
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" बदलने के लिए लड़ना पड़ता है और आसान बनाने के लिए "समझना" पड़ता है। इंसान का स्वभाव इस तरह है जो "लेकर जाना" है उसे "छोड़ रहा" है जो "यहीं रह जाना" है उसे "जोड़ रहा" है।
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कोई भी इंसान हमारा दोस्त या दुश्मन बनकर इस दुनिया में नही आता हमारा व्यवहार और बोलने का तरीका ही लोगो को दोस्त और दुश्मन बनाते हैं।
वही रहिए जो आप हैं, और वो कहिए जो आप महसूस करते हैं क्योंकि जो बुरा मानते हैं मायने नहीं रखते, और जो मायने रखते हैं वो बुरा नहीं मानते।