by Mrigendra Raj Pandey
गरीब, बेसहारा एवं लाचार लोग हमें अक्सर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के आस-पास, मंदिरों के बाहर आदि दिखाई देते है जिन्हें देखकर अधिकांश लोगों के मन में दया एवं उनकी मदद करने की भावना उत्पन्न होती है परन्तु हम कभी-कभी कुछ पैसे दे कर अपनी भावनाओं की तुष्टि करते हुए उन्हें उसी...
by Mrigendra Raj Pandey
पहला सुख निरोगी काया, एक बहुत पुरानी कहावत एवं शाश्वत सत्य है जिसे हजारों वर्षों से लोग समझते आए है। निरोगी अर्थात स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है जिसे हर इंसान को समझना ही पड़ता है। कुछ बचपन से ही समझ जाते है, कुछ युवा अवस्था में समझते है नहीं तो बुढ़ापे में तो सभी को...
by Mrigendra Raj Pandey
अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थानों से बीटेक एवं एमटेक की पढ़ाई करके, बेहतरीन पदों पर कार्य करते हुए एवं अतिव्यस्त रहने के बावजूद प्रतिपल विज्ञान के नूतन आविष्कारों के बारे में सोचते रहना, कैसे नए-नए वैज्ञानिक आविष्कार आमजन तक पहुंचे इसी में विचार मग्न रहना, तीर्थराज...
by Mrigendra Raj Pandey
वैसे तो फिल्म जगत को हरियाणा ने अनेक कोहिनूर दिए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, लेकिन एक जौहरी ऐसे भी है जिन्होंने हरियाणा के दूरदराज गांवों में छिपी हुई प्रतिभाओं को खोज-खोज कर, तराश कर उन्हें मुंबई में पहुंचा कर सितारा बना दिया। पर्दे के पीछे उस असली...
by Mrigendra Raj Pandey
बात सन 2005 ईस्वी की है जर्मनी के एक होटल में अपने दोस्तों संग खाना खाने के दौरान एक महाशय सामान्य व्यवहार बस विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का आर्डर दिए जो खा सके खाए फिर जो न नहीं खा सके उसे छोड़ दिए। जैसा कि आमतौर पर प्रायः अधिकांश भारतीय करते हैं और बिल चुका कर चलने...
by Mrigendra Raj Pandey
एक दिन सुबह-सुबह हरियाणा प्रांत के करनाल जिले के रहने वाले श्री नरेंद्र अरोड़ा जी अखबार पढ़ रहे थे अचानक उनकी नजर एक खबर पर पड़ी जिसमें क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं की दयनीय दशा के बारे में विस्तार से छपा हुआ था कि कैसे शहीदों की प्रतिमाएं अनाथ बच्चों की तरह हो गई है।...