by Mrigendra Raj Pandey
“शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा” देश को आजादी काफ़ी त्याग, बलिदान, जद्दोजहद तथा संघर्ष के बाद मिली है यह हम सभी जानते हैं। लाखों-करोड़ों लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। वैचारिक स्तर पर रास्ते एकाधिक...
by Mrigendra Raj Pandey
हर मनुष्य का अपना एक व्यक्तित्व होता है, और यही मनुष्य की पहचान भी है। कोटि-कोटि मनुष्यों की भीड़ में निराले व्यक्तित्ववाला व्यक्ति अपनी विशिष्टता के कारण पहचान ही लिया जाता है। भीड़ से अलग खुद की पहचान बनाने के लिए कुछ अलग करना पड़ता है, बने बनाए रास्ते पर चलना तो...
by Mrigendra Raj Pandey
संगीत में इतनी सामर्थ्य होता है कि मूक प्राणी, पशु, पक्षी तथा यहां तक कि पौधे भी इसके चलते तरंग में आ जाते हैं तथा प्रेम रस में निमग्न हो अंतरगान करने लगते हैं। गीत-संगीत की भाषा एवं बोल चाहे जो भी हो लेकिन उससे हृदय में स्पंदन होने लगता है। आप भाषा या सुर ताल से...
by Mrigendra Raj Pandey
बचपन से ही कुछ अलग करने की चाहत ने कोलकाता, पश्चिम बंगाल (Kolkata, West Bengal) की रहने वाली शर्मिष्ठा चक्रवर्ती जी (Sharmistha Chakraborty) को इस कदर प्रभावित किया कि आपने एक-एक कर अनेक रिकॉर्ड बना डाले। श्री विमल कुमार चक्रवर्ती जी तथा श्रीमती कृष्णा चक्रवर्ती जी की...
by Mrigendra Raj Pandey
मानव का कला से बहुत पुराना नाता है। शायद चित्रकला मानव द्वारा सीखी गई सबसे पुरानी कला है जिसके माध्यम से वह अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त कर सकता है। पाषाण काल में ही मानव ने गुफा चित्रण करना शुरू कर दिया था। होशंगाबाद और भीमबेटका क्षेत्रों की कंदराओं और गुफाओं में मानव...
by Mrigendra Raj Pandey
दो वर्ष की जिस छोटी सी आयु में सामान्य तौर पर बच्चे अपने परिवार जनों का ठीक-ठीक से नाम नहीं बता पाते उस आयु में नयागढ़, उड़ीसा के निवासी तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा (Indian Agricultural Research Institute, Pusa) में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर सेवारत डॉ. तापस...