नगाड़ा सम्राट : नरेंद्र सिंह कुशवाहा

नगाड़ा सम्राट : नरेंद्र सिंह कुशवाहा

यह अद्भुत संयोग ही है कि विश्व प्रसिद्ध ग्रंथों के रचनाकार महाकवि कालिदास जी की रचना मेघदूत (sage Kalidas authored Meghdoot) में नगाड़ा का उल्लेख किया गया है। महाकवि कालिदास जी की साधना स्थली रही उसी पावन नगरी उज्जैन के श्री नरेंद्र सिंह कुशवाहा जी (Mr. Narendra...
चक्रासन दौड़ की उड़नपरी : तनुश्री पिथोरोडी

चक्रासन दौड़ की उड़नपरी : तनुश्री पिथोरोडी

चक्रासन योग का एक कठिन आसन माना जाता है, अतः यदि चक्रासन मुद्रा में योग करना हो तो यह सामान्य व्यक्ति के लिए सरल नहीं होता है एवं यदि बात चक्रासन मुद्रा में दौड़ लगाने की की जाए तो अचंभित हुए बिना नहीं रहा जा सकता। इस पर भी जब यह पता चलता है कि इस कठिन कारनामे को करने...
दुनिया के बेमिसाल नेल आर्टिस्ट : वाजिद अली खान

दुनिया के बेमिसाल नेल आर्टिस्ट : वाजिद अली खान

लोहे की कीलों का क्या उपयोग होता है ? जवाब आसान है कीलों को दीवार पर लगाया जाता है। परन्तु कीलों को भी क्या कलात्मक रूप में प्रयोग करके असाधारण कलाकृति बनाई जा सकती है तो इसका “हां” में उत्तर देते है मध्यप्रदेश में जन्मे 40 वर्षीय जनाब मोहम्मद वाजिद अली...
अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘ई संस्कार वाटिका’ विश्व रिकॉर्ड में दर्ज

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘ई संस्कार वाटिका’ विश्व रिकॉर्ड में दर्ज

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन (Akhil Bharatvarshiy Maheshwari Mahila Sanghathan) के द्वारा दिनांक 6 – 20 मई तक आयोजित किए गए कार्यक्रम ‘ई संस्कार वाटिका’ का आयोजन किया गया जिसमें 17 देशों से 31174 बच्चों का रजिस्ट्रेशन हुआ। विभिन्न भारतीय...
एक छोटा सा विद्वान : मास्टर विवान

एक छोटा सा विद्वान : मास्टर विवान

स्कूल जाने से पूर्व एक नही, दो नही, अपितु पाँच बार वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना किसी करिश्माई बच्चे के लिए ही सम्भव है। वाशिम निवासी डॉक्टर दंपत्ति डॉ पराग सरनाईक जी एवं डॉ योगिता सरनाईक जी का अद्भुत प्रतिभा सम्पन्न बेटा मास्टर विवान (Vivan Sarnaik) एक...
समरस भाव का नायाब योग साधक: जयपाल प्रजापति

समरस भाव का नायाब योग साधक: जयपाल प्रजापति

बेहद गरीबी से बीत रहे बचपन में अंधेरे ने तब और अपना साम्राज्य स्थापित करने की पुरजोर कोशिश की जब किशोरावस्था में ही पिता श्री ब्रह्मदत्त प्रजापति जी का अकस्मात देहावसान हो गया तब बेटे जयपाल की ज़िम्मेदारी माँ संतोषी देवी जी के अकेले जिम्मे आ गई। घर की आर्थिक स्थिति...