by Mrigendra Raj Pandey
दृष्टि बाधित होने के नाते खेल न सपने वाले, मनोरंजन नहीं कर पाने वाले, छात्रों के लिए ब्रेल लिपि में गेम्स की पुस्तक का प्रकाशन स्वयं के खर्च पर कराकर, देश के लगभग 40 शहरों में घूम घूम कर छात्रों के बीच में उसका निशुल्क वितरण करना ,देश के छात्र-छात्राओं को देश की...
by Mrigendra Raj Pandey
हाथ ही शरीर का ऐसा अंग है जो हर काम को करने में साथ देता है तथा कठिन से कठिन कार्य को भी सरल बना देता है। लेकिन अचानक यदि हाथ ही न रहें तो जीवन कितना कठिन हो जाता है, इसकी कल्पना की जा सकती है। परंतु ऐसे भी व्यक्तित्व हैं जो किसी कमी से हार नहीं मानते तथा हौसलों के...
by Mrigendra Raj Pandey
कला जगत में हिंदुस्तान के लिए वैश्विक पटल पर महिलाओं की सफलता का इससे बेहतरीन उदाहरण भला और क्या हो सकता है ,कि डॉक्टर चित्रलेखा सिंह (Dr. Chitralekha Singh) विश्व की वह प्रथम महिला हैं जिन्होंने चित्रकला विषय में डिलीट की उपाधि प्राप्त की है। डॉ चित्रलेखा सिंह जी ने...
by Mrigendra Raj Pandey
प्राचीनतम ऐतिहासिक वस्तुओं, कलाकृतियों ,पुस्तकों ,पांडुलिपियों आदि का खजाना हमारे देश में मौजूद है, दुर्भाग्यवश इनमें से ढेर सारी अनुपम ऐतिहासिक कृतियां जीर्ण शीर्ण हो नष्ट होने के कगार पर पहुंच जाती हैं ।इंटक यानी इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज, लखनऊ...
by Mrigendra Raj Pandey
पीढ़ी दर पीढ़ी मानव सभ्यता का चलते जाना, मनुष्य की सृजनशीलता के कारण ही होता है। इस सृजनहार शक्ति का आधार बिंदु एक स्त्री होती है। इसी प्रकार संपूर्ण प्रकृति की शक्ति का आधार नारी को माना जाना कतई अनुपयुक्त नहीं होगा। संतान को अपने पेट में पालने से लेकर उत्पत्ति तक की...
by Mrigendra Raj Pandey
कमर से नीचे का पूरा हिस्सा दिव्यांग हो जाने के कारण जब स्वयं की रोजमर्रा की सामान्य जिंदगी जीना ही कठिन हो जाए तो ऐसी हालत में पढ़ना लिखना ,वह भी असाधारण रूप में ,इतना ही नहीं अन्य के जीवन को भी पढ़ा लिखा कर संवारने का हुनर और जज्बा हर किसी के बूते में नहीं होता है।...