by Mrigendra Raj Pandey
जिस प्रकार सैनिक देश की रक्षा करते हैं उसी प्रकार डॉक्टर पूरे समाज के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। डॉक्टर जीवन के उद्धारकर्ता होते हैं। चिकत्सक जो सेवा समाज को दे सकते वो सेवा कोई दूसरा नहीं कर सकता। विभिन्न बीमारियों की दवाएं तथा उपचार जो पहले संम्भव नहीं थे, पर अब...
by Mrigendra Raj Pandey
वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment), नारी उत्थान (Women devlopment), स्त्री विमर्श आदि के दौर में क्या अभी भी इनके प्रगति के रास्ते उतने ही सहज हैं जितने का दिखावा विभिन्न मंचों पर, बड़ी-बड़ी विचार गोष्ठियों में, सेमिनार-सम्मेलनों आदि में देखने-सुनने...
by Mrigendra Raj Pandey
साहित्य (Literature) का अविर्भाव समाज से ही होता है जिसे साहित्यकार अपने भाव के साथ मिलाकर उसे एक आकार देता है। यही रचना समाज के नवनिर्माण में पथ-प्रदर्शक की भूमिका निभाने लगती है। साहित्यकार वह सशक्त माध्यम है जो समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करता है। वह समाज में...
by Mrigendra Raj Pandey
स्वास्थ्य मनुष्य का अमूल्य धन होता है,एक स्वस्थ व्यक्ति मेहनत करके सफलता के शिखर को छू सकता है। परंतु स्वास्थ्य बिगड़ जाने पर व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं कर पाता, ऐसी स्थिति में हमें डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है। डॉक्टर का जीवन सेवा और साधना का होता है।...
by Mrigendra Raj Pandey
वर्तमान दौर में निजता की परिधि इतनी संकुचित हो गई है कि उसकी सूनी गुफाओं में मानवता का दम घुटता नजर आता है। समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सेवारत व्यक्ति अपने एवं अपनों के मोह से ही नहीं उबर पा रहे हैं ऐसी हालात में सबसे निचले पायदान पर खड़े, लड़खड़ा रहे व्यक्ति तथा...
by Mrigendra Raj Pandey
भारत कृषि प्रधान एवं ग्रामीण प्रधानता वाला देश है। आबादी का एक विशाल हिस्सा अभी भी गाँव में रहता है। यह एक दुर्भाग्य का विषय है कि काफी संख्या में गरीब, बेरोजगार आज भी हमारे देश में हैं और अत्यंत ही खेद का विषय यह है कि देश के हर कोने में भीख मांगने वालों की भी बड़ी...