“अच्छाई-बुराई”  “इंसान” के “कर्मो” में होती है। कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है, तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है। 

“अच्छाई-बुराई”  “इंसान” के “कर्मो” में होती है। कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है, तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है। 

“अच्छाई-बुराई”  “इंसान” के “कर्मो” में होती है। कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है, तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है। 

“अच्छाई-बुराई”  “इंसान” के “कर्मो” में होती है। कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है, तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है। 

जरुरत से ज्यादा मिले उसको कहते हैं नसीब भगवान का दिया सब कुछ हैं फिर भी रोता है उसको कहते हैं बदनसीब और जिंदगी में कम पाकर भी हमेशा खुश रहता है उसको कहते हैं खुशनसीब

जरुरत से ज्यादा मिले उसको कहते हैं नसीब भगवान का दिया सब कुछ हैं फिर भी रोता है उसको कहते हैं बदनसीब और जिंदगी में कम पाकर भी हमेशा खुश रहता है उसको कहते हैं खुशनसीब

“अच्छाई-बुराई”  “इंसान” के “कर्मो” में होती है। कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है, तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है। 

दुनिया में दो तरह के लोगहोते है, एक वो जो मौका आने पर साथ छोड़ देते है, दूसरे वो जो साथ देने के लिए मौका ढूंढ लेते है।

दुनिया में दो तरह के लोगहोते है, एक वो जो मौका आने पर साथ छोड़ देते है, दूसरे वो जो साथ देने के लिए मौका ढूंढ लेते है।