“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब...
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हर रोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा, पर ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में क्या मिला रहे है। 

जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हर रोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा, पर ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में क्या मिला रहे...
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

अकेले हों तब विचारों पर नियंत्रण रखें, दोस्तों मे हों तब वाणी पर नियंत्रण रखें, गुस्से मे हों तब फैसलों पर नियंत्रण रखें, समूह मे हों तब व्यवहार पर नियंत्रण रखे, जब कोई प्रसंशा करे तब घमंड पर नियंत्रण रखे,एवं जब कोई बुरा बोले तब भावनाओं पर नियंत्रण रखें।

अकेले हों तब विचारों पर नियंत्रण रखें, दोस्तों मे हों तब वाणी पर नियंत्रण रखें, गुस्से मे हों तब फैसलों पर नियंत्रण रखें, समूह मे हों तब व्यवहार पर नियंत्रण रखे, जब कोई प्रसंशा करे तब घमंड पर नियंत्रण रखे,एवं जब कोई बुरा बोले तब भावनाओं पर नियंत्रण...
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

किसी को चोट पहुँचाना उतना ही आसान है जैसे पेड़ से पत्ता तोड़ना, लेकिन किसी को खुश करना एक पेड़ उगाने जैसा है। इसमें बहुत समय, देखभाल और धैर्य लगता है।

किसी को चोट पहुँचाना उतना ही आसान है जैसे पेड़ से पत्ता तोड़ना, लेकिन किसी को खुश करना एक पेड़ उगाने जैसा है। इसमें बहुत समय, देखभाल और धैर्य लगता...
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

कहते है कि एक गलतफहमी अच्छे से अच्छे रिश्ते को तोड़ देती है। विचारणीय बात यह है कि वह रिश्ता अच्छा कैसे हुआ, जो सिर्फ एक गलतफहमी से ही टूट जाए।

कहते है कि एक गलतफहमी अच्छे से अच्छे रिश्ते को तोड़ देती है। विचारणीय बात यह है कि वह रिश्ता अच्छा कैसे हुआ, जो सिर्फ एक गलतफहमी से ही टूट...
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।

जब चलना नहीं आता था, तब कोई गिरने नहीं देता था। और जब चलना सीख लिया तो, हर कोई गिराने में लगा है। यही जीवन की सच्चाई है।

जब चलना नहीं आता था, तब कोई गिरने नहीं देता था। और जब चलना सीख लिया तो, हर कोई गिराने में लगा है। यही जीवन की सच्चाई...