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यदि आप में दूसरों के लिए "प्रार्थना" और "सेवा" करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए "प्रार्थना" करने की आवश्यकता नहीं होगी।
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गलतियाँ कीजिए क्योंकि वो तो सबसे होती हैं, पर कभी किसी के साथ गलत मत कीजिए आत्मविश्वास जीवन का वह अस्त्र है, जो बिना घाव दिए, जीत हासिल करने में सहायता करती है। सुगंध के बिना पुष्प, तृप्ति के बिना प्राप्ति, ध्येय के बिना कर्म व प्रसन्नता के बिना जीवन व्यर्थ है। किसी इंसान का बड़प्पन, उसकी हैसियत नहीं, उसकी इंसानियत तय करती है।
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रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना है।
चाह कर भी अपने प्रति लोगो की धारणा नहीं बदल सकते। इसलिए शांति से अपना जीवन जिये औऱ मस्त रहे प्रसन्न रहे।