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हम न नास्तिक है न आस्तिक, हम तो केवल वास्तविक है। जो अच्छा लगे उसको ग्रहण करो, जो बुरा लगे उसका त्याग करो फिर चाहे वो विचार हो, कर्म हो, या धर्म हो।
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अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना डूबने का डर। जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता है।
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योग्यताएँ कर्म से पैदा होती हैं जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है जब इंसान करवट लेता है। तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त करवट लेता है तो दशा बदल जाती है l
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।