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हम जिन्दगी में सोचते बहुत है, और महसुस बहुत कम करते है, इसलिए मत जियो उसके लिए, जो दुनिया के लिए खूबसूरत हो, जियो उसके लिए जो तुम्हारी, दुनिया को खूबसूरत बनाये।
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रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना है।
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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है,जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है। जब हमें मालूम होता है। कि “हालात” बहुत खराब हैं।