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स्वभाव सूर्य जैसा होना चाहिए, न उगने का अभिमान और न डूबने का गम जीने का यही अंदाज रखो । जो तुम्हे ना समझे, उसे नजरअंदाज रखो। देने के लिए कुछ न होतो सामने वाले को सम्मान दे, यह भी बड़ा दान होगा।
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शिक्षा" हमें अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर तक ले गयी। टैक्नोलॉजी हमें हस्ताक्षर से फिर अंगूठे के निशान पर ले आई। इसलिये सब फैसले हमारे नहीं होते, कुछ फैसले वक्त के भी होते हैं।
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"दुनिया" के बड़े से बड़े साइंटिस्ट ये ढूँढ रहे है कि "मंगल ग्रह" पर "जीवन" है या नहीं पर "इंसान" ये नहीं ढूँढ रहा है कि "उसके जीवन में मंगल है या नहीं"
जिस प्रकार “पानी” के बगैर, “नदी” का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार “मधुरता” के बगैर, “संबंधों” का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।