अद्भुत स्मरण शक्ति, मेधा और आध्यात्मिक साधना का परिचय देते हुए आचार्य नयचंद्र सागर सूरिश्वर जी महाराज के शिष्य, विजयचंद्र सागर जी (Vijaychandra Sahar ji), ने विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने मात्र 13 वर्ष 02 दिन की आयु में लगातार 100 श्रुत प्रश्नों के क्रमबद्ध उत्तर देने वाले सबसे कम उम्र के प्रतिभागी बनकर इतिहास रच दिया।
यह असाधारण उपलब्धि 10 अगस्त 2025 को इंदौर, मध्य प्रदेश में अभय प्रशाल में आयोजित ‘बाल शतावधान’ (Bal Shatavdhan) कार्यक्रम के दौरान संपन्न हुई, जिसका आयोजन सरस्वती साधना रिसर्च फाउंडेशन (Saraswati Sadhna Foundation) ने किया। विजयचंद्र सागर जी ने आश्चर्यजनक एकाग्रता और शांत मन से एक-के-बाद-एक पूछे गए 100 प्रश्नों के उत्तर सटीक क्रम में देकर उपस्थित 6000 से अधिक श्रोताओं को चकित कर दिया।
कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण था, जहाँ विद्वानों, संतों और बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने इस दुर्लभ बौद्धिक प्रदर्शन का साक्षात्कार किया। शतावधान भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की एक प्राचीन परंपरा है, जिसमें प्रतिभागी अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति और मानसिक एकाग्रता के माध्यम से अनेक प्रश्नों का उत्तर क्रमवार देते हैं।
इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स एशिया हेड, डॉ. मनीष विश्नोई (Dr. Manish Vishnoei, Asia Head, Golden Book of World Records) भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सफल प्रयास के बाद उन्होंने विजयचंद्र सागर जी को GBWR का प्राविजनल सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया।
यह उपलब्धि न केवल विजयचंद्र सागर जी की अद्वितीय प्रतिभा को उजागर करती है, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा की अमूल्य धरोहर को भी पुनः स्थापित करती है। इंदौर और जैन समाज के लिए यह क्षण गर्व का विषय बन गया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ विजयचंद्र सागर जी ने अपने नाम को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाते हुए यह सिद्ध कर दिया कि कम उम्र में भी गहन साधना, अनुशासन और ज्ञान के प्रति निष्ठा से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।
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