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"सवेरा तो रोज ही होता है परन्तु शुभप्रभात क्या होता है?" "जीवन में जिस दिन आप अपने अंदर की बुराईयो को समाप्त कर उच्च विचार तथा अपनी आत्मा को शुद्ध कर दिन की शुरुआत करते हो वही दिन शुभप्रभात होता है"।
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"वक्त" भी बड़े ही कमाल का होता है, सबसे इंतजार करवा लेता है लेकिन खुद कभी किसी का इंतजार नही करता।
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जिस प्रकार "पानी" के बगैर, "नदी" का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार "मधुरता" के बगैर, "संबंधों" का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।
जब हम नादान थे तो जिंदगी के मजे लेते थे, समझदार हुए अब तो ये जिंदगी हमारे मजे ले रही है।