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जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हर रोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा, पर ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में क्या मिला रहे है।
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"बोलना" और "प्रतिक्रिया" करना जरूरी है लेकिन "संयम" और "सभ्यता" का दामन नहीं छूटना चाहिये आजाद रहिये "विचारों" से परन्तु बंधे रहिये "संस्कारों" से।
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झुक जाते हैं जो लोग आपके लिए किसी भी हद् तक वह सिर्फ आपकी इज़्ज़त ही नहीं करते, आपसे प्रेम भी करते हैं किसी का सरल स्वभाव उसकी कमज़ोरी नहीं होता है उसके संस्कार होते हैं केवल अहंकार ही ऐसी दौड़ है जहाँ हर जीतने वाला हार जाता है।
“उम्मीद” हमारी वह शक्ति है, जो हमें उस समय भी प्रसन्न बनाये रखती है जब हमें मालूम होता है कि “हालात” बहुत खराब हैं।