by Mrigendra Raj Pandey
हावी जब कटुता हो जाती, घटता जाए स्नेह।ज्यों अंदर अंदर काटता मानव को मधुमेह ।बरतना सावधानी हमने गर न रखी जारी,बीमारियां हमारे ऊपर पड़ सकती हैं भारी। वैसे तो उपरोक्त पंक्तियां स्वास्थ्य से संबंधित हैं एवं कवि ने इसे काव्य रूप अंत्यंत सुन्दर एवं सृजनात्मक रूप में लिखा...
by Mrigendra Raj Pandey
वर्ष 1982 की फिल्म” प्रेम रोग” में आपने “मेरी किस्मत में तू नहीं शायद” और “मैं हूं प्रेम रोगी” गीत गाकर फिल्म जगत में सभी को अपना मुरीद बना लिया था। इस फिल्म में श्री ऋषि कपूर जी के साथ आपकी आवाज इतनी जमी कि श्री ऋषि कपूर जी की...
by Mrigendra Raj Pandey
कम उम्र में ही सुश्री एकता कपूर जी (Eakta Kapor) ने कई बड़ी-बड़ी उपलब्धियां अर्जित कर ली हैं जो कि सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता है। सुश्री एकता कपूर जी ने अपने कैरियर की शुरुआत 17 वर्ष की अल्पायु में ही कर दी थी। शुरुआत में आपने विज्ञापन और फीचर फिल्म...
by Mrigendra Raj Pandey
ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के बाद आपकी तीन बार शिक्षक की सरकारी नौकरी लगी लेकिन सरकारी शिक्षक बनने के बजाय श्री सुंडाराम वर्मा जी (Mr. Sundaram Verma) ने खेती करने को अधिक तवज्जो दी और इस कार्य में लग गए। क्योंकि राजस्थान प्रांत जल संकट के लिए बहुत दिनों से जाना जाता है...
by Mrigendra Raj Pandey
मनुष्य के जीवन को बचा लेना और रोगमुक्त कर देने से भी कीमती कोई और काम नहीं होता है इसीलिए चिकित्सक (Doctor) को भगवान का दर्जा दिया जाता है। वर्तमान परिवेश में नित नूतन बीमारियां उत्पन्न हो रही है, लेकिन प्रसन्नता का विषय यह है कि आयुर्वेद एवं योग के माध्यम से...
by Mrigendra Raj Pandey
स्वास्थ्य मनुष्य का अमूल्य धन होता है,एक स्वस्थ व्यक्ति मेहनत करके सफलता के शिखर को छू सकता है। परंतु स्वास्थ्य बिगड़ जाने पर व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं कर पाता, ऐसी स्थिति में हमें डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है। डॉक्टर का जीवन सेवा और साधना का होता है।...
by Kishore Tare
यदि आज की पीढ़ी से प्रश्न पूछा जाए कि किसी क्रांतिकारी शहीद का नाम बताओ, तो वे पहला जवाब सरदार भगतसिंह कहेंगे क्योंकि वो और किसी का नाम नही जानते। अंग्रेजों का भारतीयों पर भयानक अत्याचार वे न तो जानेगे न ही समझ सकते है। 600-700 वर्षो का भयानक काल पहले मुसलमानों द्वारा...
by Mrigendra Raj Pandey
वर्तमान दौर में निजता की परिधि इतनी संकुचित हो गई है कि उसकी सूनी गुफाओं में मानवता का दम घुटता नजर आता है। समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सेवारत व्यक्ति अपने एवं अपनों के मोह से ही नहीं उबर पा रहे हैं ऐसी हालात में सबसे निचले पायदान पर खड़े, लड़खड़ा रहे व्यक्ति तथा...
by Mrigendra Raj Pandey
भारत कृषि प्रधान एवं ग्रामीण प्रधानता वाला देश है। आबादी का एक विशाल हिस्सा अभी भी गाँव में रहता है। यह एक दुर्भाग्य का विषय है कि काफी संख्या में गरीब, बेरोजगार आज भी हमारे देश में हैं और अत्यंत ही खेद का विषय यह है कि देश के हर कोने में भीख मांगने वालों की भी बड़ी...