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स्वभाव सूर्य जैसा होना चाहिए, न उगने का अभिमान और न डूबने का गम जीने का यही अंदाज रखो । जो तुम्हे ना समझे, उसे नजरअंदाज रखो। देने के लिए कुछ न होतो सामने वाले को सम्मान दे, यह भी बड़ा दान होगा।
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जिस प्रकार "पानी" के बगैर, "नदी" का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार "मधुरता" के बगैर, "संबंधों" का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।
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जमीन अच्छी हो खाद अच्छा हो परन्तु पानी खारा हो तो फूल खिलते नही, भाव अच्छे हो कर्म भी अच्छे हो मगर वाणी खराब हो तो संबंध कभी टिकते नही !
“सारी मुसीबतें” रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो जाएंगीं।