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"अच्छाई-बुराई" "इंसान" के "कर्मो" में होती है। कोई "बांस" का "तीर" बनाकर किसी को "घायल" करता है, तो कोई "बांसुरी" बनाकर बांस में "सुर" को भरता है।
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"दुनिया की लगभग हर चीज सिर्फ ठोकर लगने से ही टूट जाती है, सिर्फ एक कामयाबी ही है, जो ठोकर खाने के बाद ही मिलती है।”
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कागज के टुकड़े करना सरल है, कपड़े के टुकड़े करना थोड़ा कठिन है, लोहे के टुकड़े करना काफी कठिन है, लेकिन सबसे ज्यादा कठिन कुछ है तो वह है हमारे अंदर स्थित अहम के टुकड़े करना।
क्रोध आने पर चिल्लाने के लिऐ कोई ताकत नहीं चाहिए। मगर क्रोध आने पर चुप रहने के लिए,बहुत ताकत चाहिए।