यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

एक निऱाशावादी इंसान हर मौके पर सिर्फ कठिनाइयों को ही देखता है, जबकि एक आशावादी इंसान हर कठिनाई में मौके देखता है।

एक निऱाशावादी इंसान हर मौके पर सिर्फ कठिनाइयों को ही देखता है, जबकि एक आशावादी इंसान हर कठिनाई में मौके देखता...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

“किसी के प्रति मन में क्रोध लिये रहने की अपेक्षा उसे तुरंत प्रकट कर देना अधिक अच्छा है, जैसे क्षणभर में जल जाना देर तक सुलगने से अधिक अच्छा है।”

“किसी के प्रति मन में क्रोध लिये रहने की अपेक्षा उसे तुरंत प्रकट कर देना अधिक अच्छा है, जैसे क्षणभर में जल जाना देर तक सुलगने से अधिक अच्छा...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

गुस्सा करने के बदले रो लेना अच्छा है कि गुस्सा दूसरों को तक़लीफ़ देता है जबकि आंसू चुपचाप आत्मा में से बहकर हृदय को स्वच्छ करते हैं।

गुस्सा करने के बदले रो लेना अच्छा है कि गुस्सा दूसरों को तक़लीफ़ देता है जबकि आंसू चुपचाप आत्मा में से बहकर हृदय को स्वच्छ करते...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है। दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए अन्न के कण को “और” आनंद के क्षण को।

विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है। दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए अन्न के कण को “और” आनंद के क्षण...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता है।

इंसान के जीवन में सच्ची सरलता, बातों से नहीं आती, बनावट से नहीं आती, पैसे से नहीं मिलती, विरासत में भी नहीं मिलती। इसे पाने के लिए अपना अहंकार व दम्भ समाप्त करना होता...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

“सारी मुसीबतें” रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो जाएंगीं।

“सारी मुसीबतें” रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेंगी और उठा लेंगे तो एकदम हल्की हो...
यदि आप में दूसरों के लिए “प्रार्थना” और “सेवा” करने की आदत है। तो आपको स्वयं के लिए “प्रार्थना” करने की आवश्यकता नहीं होगी।

दौलत और अमीरी इंसान को थोडे़ वक्त के लिए बड़ा बनाती है, लेकिन इंसानियत और अच्छे विचार इंसान को हमेशा बुलंद रखते हैं।

दौलत और अमीरी इंसान को थोडे़ वक्त के लिए बड़ा बनाती है, लेकिन इंसानियत और अच्छे विचार इंसान को हमेशा बुलंद रखते...
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