जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।

जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।

जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए...
जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।

सच्चाई और अच्छाई की तलाश में पूरी दुनिया घूम लो, अगर वह खुद के अंदर नही है, तो फिर वह आपको कहीं नही मिल सकती।

सच्चाई और अच्छाई की तलाश में पूरी दुनिया घूम लो, अगर वह खुद के अंदर नही है, तो फिर वह आपको कहीं नही मिल...
जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।

किसी को चोट पहुँचाना उतना ही आसान है जैसे पेड़ से पत्ता तोड़ना, लेकिन किसी को खुश करना एक पेड़ उगाने जैसा है। इसमें बहुत समय, देखभाल और धैर्य लगता है।

किसी को चोट पहुँचाना उतना ही आसान है जैसे पेड़ से पत्ता तोड़ना, लेकिन किसी को खुश करना एक पेड़ उगाने जैसा है। इसमें बहुत समय, देखभाल और धैर्य लगता...
जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।

छल में बेशक बहुत बल है, लेकिन माफ़ी आज भी अंतिम हल है। यक़ीन करना सीखो, शक तो सारी दुनिया करती है “इज्जत और तारीफ” मांगी नही जाती है, कमाई जाती है।

छल में बेशक बहुत बल है, लेकिन माफ़ी आज भी अंतिम हल है। यक़ीन करना सीखो, शक तो सारी दुनिया करती है “इज्जत और तारीफ” मांगी नही जाती है, कमाई जाती...
जिंदगी की बैंक में जब प्यार का बैलेंस कम हो जाता है तब हंसी खुशी के चेक बाउंस होने लगते हैं। इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए।

रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना है।

रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना...
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