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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
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क्या खुब कहा है किसी ने, बीतता वक़्त है, लेकिन। ख़र्च हम हो जाते हैं। कैसे "नादान"है हम दुःख आता है। तो,"अटक" जाते है! औऱ सुख आता है तो "भटक" जाते हैं।
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"अच्छे व्यक्ति" के साथ "संबंध" उस "गन्ने" के समान है जिसे आप तोड़ो या मरोड़ो या काटो या फिर कुचल दो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा कभी किसी को छोटा न समझिए हजारों के कपड़े शोरूम में लटकते रह गए और छोटा सा "मास्क" करोड़ों का व्यापार कर गया।
समस्याओं का अपना कोई साईज नही होता। वो तो सिर्फ हमारी हल करने की क्षमता के आधार पर छोटी और बडी़ होती है।