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जब तक आप सामने वाले के मन की करते है, तो अच्छे है। अगर, एक बार अपने मन की कर ली तो, सभी अच्छाइयां बुराई में तब्दील हो जाती है।
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“अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं हैं, जितना की सीखने की इच्छा ना रखना।”
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गलत व गलती मे बहुत छोटा फर्क होता है! गलत सदा गलत नीयत से ही संभव होता है जबकि, गलती सदा भूल वश होती है! इसलिये गलतियाँ तो कीजिए, पर गलत किसी के साथ मत कीजिये !
उत्तम से सर्वोत्तम वहीं हुआ है जिसने आलोचनाओं को सुना है और सहा है।