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चाबी से खुला ताला बार बार काम मे आता है, लेकिन हथौड़े से खुलने पर दुबारा काम का नही रहता। इसी तरह संबन्धों के ताले को क्रोध के हथौड़े से नहीं बल्कि प्रेम की चाबी से खोलें।
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रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना है।
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"खामोश" चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती "आँखों" में भी ,"जख्म" गहरे होते है, जिनसे अक्सर "रूठ" जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा "गहरे" होते है।
जिंदगी को खुलकर जीने के लिए एक छोटा सा उसूल बनाए रोज कुछ अच्छा याद रखें और कुछ बुरा भूल जाए।