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"बहस" और "बातचीत" में एक बड़ा फर्क है "बहस" सिर्फ़ यह सिद्ध करती है, *कि "कौन सही है" । जबकि "बातचीत" यह तय करती है,कि "क्या सही है"।
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“ज्ञानी होने से शब्द समझ में आने लगते हैं और अनुभवी होने से अर्थ”
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कच्चे आम का स्वभाव खट्टा है, गुड़ का स्वभाव मीठा है, मिर्च का स्वभाव तीखा है, नमक की प्रकृति लवणता है, फिर भी अचार ने कितना अच्छा एडजस्टमेंट कर लिया है और सभी को अच्छा लगता है। उसी प्रकार जिंदगी में सबके साथ एवं सभी के स्वभाव के साथ एडजस्टमेंट करना सीख लें तो सबको कितने अच्छे लगेंगे और जीवन मधुर हो सकता है l
एक निऱाशावादी इंसान हर मौके पर सिर्फ कठिनाइयों को ही देखता है, जबकि एक आशावादी इंसान हर कठिनाई में मौके देखता है।