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छल में बेशक बहुत बल है, लेकिन माफ़ी आज भी अंतिम हल है। यक़ीन करना सीखो, शक तो सारी दुनिया करती है "इज्जत और तारीफ" मांगी नही जाती है, कमाई जाती है।
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पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता जो कर्म को समझता है उसे धर्म को समझने की जरूरत ही नहीं संपत्ति के उत्तराधिकारी कोई भी या एक से ज्यादा हो सकते है लेकिन कर्मों के उत्तराधिकारी केवल हम स्वयं ही होते है l
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जिंदगी का सच हम भी वही है,संबंध भी वही हैं,रास्ते भी वही है। बदलते हैं,तो सिर्फ 'समय,संजोग और नजर।
जो चाहा वह मिल जाना सफलता है। जो मिला है उसको चाहना प्रसन्नता है।