क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

योग एवं प्रकृति में तादात्म्य स्थापित करने वाले प्रेरणा पुंज:  श्री हरिचंद्र गर्ग जी

योग एवं प्रकृति में तादात्म्य स्थापित करने वाले प्रेरणा पुंज: श्री हरिचंद्र गर्ग जी

घर की फुलवारी में 7 फुट 2 इंच का गेंदे का पौधा उगाने वाले तथा 7 फुट 5 इंच का तुलसी का पौधा उगाने वाले फरीदाबाद निवासी 70 वर्षीय श्री हरिचंद्र गर्ग जी (Mr. Hari chandra Garg) एक तरफ प्रकृति की इतनी गहन साधना करते हैं, तो दूसरी तरफ इस आयु में कठिन योग क्रियाओं से भी सभी...
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

चाह कर भी अपने प्रति लोगो की धारणा नहीं बदल सकते। इसलिए शांति से अपना जीवन जिये औऱ मस्त रहे प्रसन्न रहे।

चाह कर भी अपने प्रति लोगो की धारणा नहीं बदल सकते। इसलिए शांति से अपना जीवन जिये औऱ मस्त रहे प्रसन्न रहे।

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

“बहस” और “बातचीत” में एक बड़ा फर्क है “बहस” सिर्फ़ यह सिद्ध करती है, *कि “कौन सही है” । जबकि “बातचीत” यह तय करती है,कि “क्या सही है”।

“बहस” और “बातचीत” में एक बड़ा फर्क है “बहस” सिर्फ़ यह सिद्ध करती है, *कि “कौन सही है” । जबकि “बातचीत” यह तय करती है,कि “क्या सही है”।

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

 दुख: ही इंसान  का सबसे सच्चा मित्र है जब तक साथ रहता है,तो बहुत सबक सिखाता है और जब छोड़कर जाता है तो सुख देकर जाता है.!!

 दुख: ही इंसान  का सबसे सच्चा मित्र है जब तक साथ रहता है,तो बहुत सबक सिखाता है और जब छोड़कर जाता है तो सुख देकर जाता है.!!

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।

प्रकृति ने सिर्फ दो ही रास्ते दिए हैं! “या तो देकर जाएं या, फिर.. छोड़कर जाएं”! साथ ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है! अतःकुछ ऐसा छोड़कर जाए कि हमेशा लोगो कि यादो में बने रहे।

प्रकृति ने सिर्फ दो ही रास्ते दिए हैं! “या तो देकर जाएं या, फिर.. छोड़कर जाएं”! साथ ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है! अतःकुछ ऐसा छोड़कर जाए कि हमेशा लोगो कि यादो में बने रहे।

हर हेड हेलमेट अभियान से बना विश्व कीर्तिमान

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दुपहिया वाहनों के चलते आमजन को दैनिक जीवन में काफी सुविधा मिलने लगी है, लेकिन इसी के साथ तीव्र गति से वाहन को चलाने, गाड़ी चलाने के कायदे कानूनों का अनुपालन न करने आदि के चलते दुर्घटनाओं में भी तेजी के साथ वृद्धि हो रही है। स्कूटर, मोटरसाइकिल आदि दुपहिया वाहन चलाते...
योग की समृद्ध परंपरा का दुबई में परचम फहरानेवाली गोल्डन गर्ल : समृद्धि कालिया

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आजकल की व्यस्त जीवन शैली में योग बहुत ही आवश्यक हो गया है। स्त्री हो या पुरुष, वृद्ध हो या जवान, या बच्चे, योग के फायदे सभी के लिए हैं, परन्तु अक्सर लोग एक उम्र के बाद या किसी ना किसी बीमारी से ग्रसित होने के बाद ही योग करना शुरू करते है, परंतु यदि सभी बचपन से ही योग...
गौ भक्त वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी पहलवान: संजय सिंह

गौ भक्त वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी पहलवान: संजय सिंह

पहलवानी का प्रारंभ संभवत उस समय हुआ जब मनुष्य युद्ध के दौरान शस्त्रों का प्रयोग नहीं करता था । शारीरिक बल की ही प्रधानता रही होगी तथा विजय प्राप्त करने हेतु विभिन्न दांव- पेंच सीखे गए होंगे ।वैसे तो पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है, खास अवसरों पर शासक वर्ग...
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