by Mrigendra Raj Pandey
अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थानों से बीटेक एवं एमटेक की पढ़ाई करके, बेहतरीन पदों पर कार्य करते हुए एवं अतिव्यस्त रहने के बावजूद प्रतिपल विज्ञान के नूतन आविष्कारों के बारे में सोचते रहना, कैसे नए-नए वैज्ञानिक आविष्कार आमजन तक पहुंचे इसी में विचार मग्न रहना, तीर्थराज...
by Mrigendra Raj Pandey
उत्तर प्रदेश का एक जिला, बलरामपुर अभी भी विकास के नूतन मानदंडों को प्राप्त करने में पूर्णरूपेण सफल नहीं हुआ है। इंटरनेट एवं हाई फ्रीक्वेंसी के सूचनात्मक उपकरण तो गांव में पहुंच गए हैं, लेकिन शैक्षणिक स्थिति एवं स्वास्थ्यगत समस्याएं अभी भी मुंह बाए खड़ी रहती हैं। ऐसी...
by Mrigendra Raj Pandey
वैसे तो फिल्म जगत को हरियाणा ने अनेक कोहिनूर दिए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, लेकिन एक जौहरी ऐसे भी है जिन्होंने हरियाणा के दूरदराज गांवों में छिपी हुई प्रतिभाओं को खोज-खोज कर, तराश कर उन्हें मुंबई में पहुंचा कर सितारा बना दिया। पर्दे के पीछे उस असली...
by Mrigendra Raj Pandey
बात सन 2005 ईस्वी की है जर्मनी के एक होटल में अपने दोस्तों संग खाना खाने के दौरान एक महाशय सामान्य व्यवहार बस विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का आर्डर दिए जो खा सके खाए फिर जो न नहीं खा सके उसे छोड़ दिए। जैसा कि आमतौर पर प्रायः अधिकांश भारतीय करते हैं और बिल चुका कर चलने...
by Mrigendra Raj Pandey
एक दिन सुबह-सुबह हरियाणा प्रांत के करनाल जिले के रहने वाले श्री नरेंद्र अरोड़ा जी अखबार पढ़ रहे थे अचानक उनकी नजर एक खबर पर पड़ी जिसमें क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं की दयनीय दशा के बारे में विस्तार से छपा हुआ था कि कैसे शहीदों की प्रतिमाएं अनाथ बच्चों की तरह हो गई है।...
by Mrigendra Raj Pandey
उत्तराखंड की वादियों को तो प्रकृति ने अपने प्राकृतिक स्वरूप में काफी समृद्ध बनाया है लेकिन उसी प्राकृतिक छटावों के बीच गरीबी से अभिशप्त दर दर की ठोकर खाते भीख मांगते बच्चों को जब एक युवती देखती हैं तो उन्हें अपने बचपन के संघर्ष में दिन याद आ जाते हैं और वह भावुक हो...
by Mrigendra Raj Pandey
दृष्टि बाधित होने के नाते खेल न सपने वाले, मनोरंजन नहीं कर पाने वाले, छात्रों के लिए ब्रेल लिपि में गेम्स की पुस्तक का प्रकाशन स्वयं के खर्च पर कराकर, देश के लगभग 40 शहरों में घूम घूम कर छात्रों के बीच में उसका निशुल्क वितरण करना ,देश के छात्र-छात्राओं को देश की...
by Mrigendra Raj Pandey
ममत्व के नायाब खजाने से प्रकृति ने मात्र माँ को ही नवाजा है। इस खजाने के अक्षय कोष का अमृत रूपी रसपान करने का सौभाग्य अनेक मनुष्यों को नहीं मिल पाता है। परमपिता परमेश्वर समय-समय पर धरती पर ऐसी देवियों को भेजते रहते है जो अनाथ और बेसहारा लोगों के लिए माँ के आंचल का सुख...
by Mrigendra Raj Pandey
साहित्य एवम् संगीत (litrature & music) दोनों ही लोगों के दिलों को छूने में कारगर होती है। आमजन की पीड़ा को अपनी लेखनी के माध्यम से उतारकर काव्य के रूप में सुनाना हो या प्रकृति के विविध स्वरूपों का वर्णन। लेखन की जादूगरनी की तरह लोगों के दिलों को छू कर श्रोताओं के...