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पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता जो कर्म को समझता है उसे धर्म को समझने की जरूरत ही नहीं संपत्ति के उत्तराधिकारी कोई भी या एक से ज्यादा हो सकते है लेकिन कर्मों के उत्तराधिकारी केवल हम स्वयं ही होते है l
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आप अकेले बोल तो सकते है,परन्तु बातचीत नहीं कर सकते। आप अकेले आनन्दित हो सकते है,परन्तु उत्सव नहीं मना सकते। अकेले आप मुस्करा तो सकते है परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं यही रिश्तों की खूबसूरती है।
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हम जिन्दगी में सोचते बहुत है, और महसुस बहुत कम करते है, इसलिए मत जियो उसके लिए, जो दुनिया के लिए खूबसूरत हो, जियो उसके लिए जो तुम्हारी, दुनिया को खूबसूरत बनाये।
रंग रूप देखकर किसी की फितरत का अंदाजा मत लगाना क्योंकि वफ़ादार और अच्छे लोग अक्सर सादगी में ही मिलते हैं।