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स्वभाव सूर्य जैसा होना चाहिए, न उगने का अभिमान और न डूबने का गम जीने का यही अंदाज रखो । जो तुम्हे ना समझे, उसे नजरअंदाज रखो। देने के लिए कुछ न होतो सामने वाले को सम्मान दे, यह भी बड़ा दान होगा।
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अच्छे लोगों की परीक्षा न लीजिए, वे पारे की तरह होते हैं कोई उन पर चोट करता है तो वे टूटते नहीं, फिसल कर चुपचाप आपकी जिन्दगी से निकल जाते हैं
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चलते रहे कदम तो। किनारा जरुर मिलेगा।। अन्धकार से लड़ते रहे। सवेरा जरुर खिलेगा। जब ठान लिया मंजिल पर जाना। तो रास्ता जरुर मिलेगा। ऐ राही ना थक, चलता चल। एक दिन समय जरुर फिरेगा।
जिस प्रकार “पानी” के बगैर, “नदी” का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार “मधुरता” के बगैर, “संबंधों” का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।