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क्या खुब कहा है किसी ने, बीतता वक़्त है, लेकिन। ख़र्च हम हो जाते हैं। कैसे "नादान"है हम दुःख आता है। तो,"अटक" जाते है! औऱ सुख आता है तो "भटक" जाते हैं।
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समय गूंगा नहीं बस मौन है, वक्त पर बताता है किसका कौन है। ताक़त और पैसा ज़िन्दगी के फल हैं, परिवार और मित्र जिन्दगी की जड़ हैं, हम फल के बिना अपने आप को चला सकते हैं, पर जड़ के बिना खड़े नहीं हो सकते।
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कर्मों की आवाज़ शब्दों से भी ऊँची होती है I यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए I आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए तब तक कमाओ जब तक "महंगी" चीज "सस्ती" ना लगने लगे चाहे वो सामान हो या सम्मान।
कल एक बात सीखी रंगों से,अगर निखरना है तो बिखरना जरूरी है l जीवन में सुख,आनंद मिले तो शुक्र करो, ना मिले तो सब्र करो।