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अपने स्वभाव को हमेशा सूर्य की तरह रखिए, ना उगने का अभिमान ना डूबने का डर। जीवन में तूफान आने भी ज़रूरी हैं क्यूंकि तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है, कौन हाथ छोड़ देता है।
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नमक जैसा बनाइये अपना "व्यक्तित्व" आपकी उपस्थिति का भले ही पता न चले पर अनुपस्थिति का अहसास अवश्य होना चाहिये।
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"कल्पनाएं" लिखना जितना आसान होता है, "भावनाएं" लिखना उतना ही मुश्किल। मौन और मुस्कान दोनो का इस्तेमाल कीजिए, मौन, रक्षाकवच है, तो मुस्कान, स्वागत द्वार।
जिंदगी का सच हम भी वही है,संबंध भी वही हैं,रास्ते भी वही है। बदलते हैं,तो सिर्फ ‘समय,संजोग और नजर।