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वक़्त के भी अजीब किस्से हैं किसी का कटता नहीं, और किसी के पास होता नहीं वक़्त दिखाई नहीं देता है, पर बहुत कुछ दिखा देता है अपनापन तो हर कोई दिखाता है, पर अपना कौन है ये वक़्त दिखाता है।
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रिश्तों मे तकरार का एक ही कारण है, मैं सही, तुम गलत। कीमत दोनों की चुकानी पड़ती है। बोलने वाले को भी और चुप रहने वाले को भी। इसलिए वास्तव में वही समझदार है, जिसे ये ज्ञान हो जाये कि कहां बोलना है और कहां चुप रहना है।
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"मेहनत का फल" और "समस्या का हल" देर से ही सही पर जरूर मिलता है। जो आनंद अपनी छोटी पहचान बनाने मे है, वो किसी बड़े की परछाई बनने मे नही है।
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।