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"वक्त" भी बड़े ही कमाल का होता है, सबसे इंतजार करवा लेता है लेकिन खुद कभी किसी का इंतजार नही करता।
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शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुःखी कर जाता है, और दूसरा शब्द मन को खुश कर जाता है, क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व और आचरण का परिचय कराती है।
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झुक जाते हैं जो लोग आपके लिए किसी भी हद् तक वह सिर्फ आपकी इज़्ज़त ही नहीं करते, आपसे प्रेम भी करते हैं किसी का सरल स्वभाव उसकी कमज़ोरी नहीं होता है उसके संस्कार होते हैं केवल अहंकार ही ऐसी दौड़ है जहाँ हर जीतने वाला हार जाता है।
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा करना चाहिए कि कल जब क्रोध शांत हो तो खुद को खुद की नजरों में कभी भी शर्मिंदा ना होना पड़े।