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यदि आप के चंद मीठे बोल से किसी का रक्त बढ़ाता है तो यह भी "रक्तदान" है। यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने से उसकी थकावट दूर होती है तो यह "श्रम दान" है। यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लेते हैं कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह "अन्न दान" है।
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सच्चाई और अच्छाई की तलाश में पूरी दुनिया घूम लो, अगर वह खुद के अंदर नही है, तो फिर वह आपको कहीं नही मिल सकती।
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जमीन अच्छी हो खाद अच्छा हो परन्तु पानी खारा हो तो फूल खिलते नही, भाव अच्छे हो कर्म भी अच्छे हो मगर वाणी खराब हो तो संबंध कभी टिकते नही !
” खुशियों” का ताल्लुक “दौलत” से नही होता जिसका मन “मस्त” है उसके पास “समस्त” है।