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जीवन तो बांसुरी की तरह है, इसमें बाधा रूपी कितने ही छेद क्यों ना हो, लेकिन जिसे बजाना आ गया, समझो उसे जीना आ गया।
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"वाणी" और "पानी" दोनों में ही "छवि" नज़र आती है "पानी" स्वच्छ हो तो "चित्र" नज़र आता है "वाणी" मधुर हो तो "चरित्र" नज़र आता है।
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नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते है, सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते है। कश्तियां बदलने की जरूरत नहीं दिशा को बदलो तो किनारे खुद-ब-खुद बदल जाते हैं।