Related Posts
-
जब चलना नहीं आता था, तब कोई गिरने नहीं देता था। और जब चलना सीख लिया तो, हर कोई गिराने में लगा है। यही जीवन की सच्चाई है।
-
सच्चे व्यक्ति का व्यक्तित्व नमक की तरह अनोखा होता है, जिसकी उपस्थिति याद नही रहती, मगर उसकी अनुपस्थिति प्रत्येक चीज को बेस्वाद बना देती है।
-
जिस प्रकार "पानी" के बगैर, "नदी" का कोई मतलब नहीं रह जाता है, उसी प्रकार "मधुरता" के बगैर, "संबंधों" का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।