“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

”बदलना’ तय है ! हर चीज़ का.इस संसार में! बस कर्म अच्छे करते रहें। किसी का जीवन बदलेगा। किसी का ‘दिल’ बदलेगा, तो किसी के ‘दिन’ भी बदलेंगे!

”बदलना’ तय है ! हर चीज़ का.इस संसार में! बस कर्म अच्छे करते रहें। किसी का जीवन बदलेगा। किसी का ‘दिल’ बदलेगा, तो किसी के ‘दिन’ भी बदलेंगे!

“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

जिसकी सोच में आत्मविश्वास की महक है, जिसके इरादों में हौसले की मिठास है, और जिसकी नीयत में सच्चाई का स्वाद है, उसकी पूरी जिन्दगी महकता हुआ ” गुलाब ” है ।

जिसकी सोच में आत्मविश्वास की महक है, जिसके इरादों में हौसले की मिठास है, और जिसकी नीयत में सच्चाई का स्वाद है, उसकी पूरी जिन्दगी महकता हुआ ” गुलाब ” है ।

“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

दिमाग कचरे का डब्बा नही, जिसमे आप, क्रोध, लोभ, मोह, अभिमान, और जलन रखे, दिमाग एक खजाना है जिसमे आप, प्यार, सम्मान, ज्ञान, विज्ञान, मानवता, दया, जैसी बहुमूल्य चीजे रख सकते है। याद रखिये असफलता अनाथ होती है, और सफलता के रिश्तेदार अनेक होते हैं। जहाँ आप कुछ नहीं कर सकते। वहाँ भी एक चीज जरूर कीजिए। “कोशिश “

दिमाग कचरे का डब्बा नही, जिसमे आप, क्रोध, लोभ, मोह, अभिमान, और जलन रखे, दिमाग एक खजाना है जिसमे आप, प्यार, सम्मान, ज्ञान, विज्ञान, मानवता, दया, जैसी बहुमूल्य चीजे रख सकते है। याद रखिये असफलता अनाथ होती है, और सफलता के रिश्तेदार अनेक होते हैं। जहाँ आप कुछ नहीं कर सकते। वहाँ भी एक चीज जरूर कीजिए। “कोशिश ”

“खामोश” चहरे पर हजारो पहरे होते है। हँसती “आँखों” में भी ,”जख्म” गहरे होते है, जिनसे अक्सर “रूठ” जाते है हम, असल में उनसे ही, रिश्ते ज्यादा “गहरे” होते है।

जो मुझे आता है वो मैं कर लूँगा, जो मुझे नहीं आता वो मैं सीख लूँगा, जीवन में सफलता का यही मूल मंत्र है।

जो मुझे आता है वो मैं कर लूँगा, जो मुझे नहीं आता वो मैं सीख लूँगा, जीवन में सफलता का यही मूल मंत्र है।